Thursday, July 22, 2010

वाह ताज बोलिए!

पिछले सप्ताहांत आगरा और फतेहपुर सीकरी हो कर लौटा हूँ. ताजमहल, सिकन्दरा (अकबर का मकबरा) और फतेहपुर सीकरी देख कर.
जी, पहली बार.
ताजमहल की हजारों तस्वीरों ज़ेहन में लिए हुए था. फिर भी, असल चीज को देखना एक भौंचक्का कर देने वाला अनुभव था.
पूर्वी दरवाजे से पहली झलक में ऐसा लगा जैसे अँधेरे के पार एक जादुई संसार चमक रहा हो. और इस शानदार ईमारत के रु-ब-रु हो कर तो वाकई माना कि इसे संगमरमर में ग़ज़ल यूं ही नहीं कहा गया है. यह फख्र होता है कि दुनिया के पर्यटन नक़्शे पर इतनी कद्दावर निशानी हमारे पास है.
पर इसको दुनिया को परोसने के लिए थोड़ी मेहनत और करने की ज़रुरत है.
कमोबेश यही हालत फतेहपुर सीकरी और सिकन्दरा की है.
दोनों शानदार जगह हैं. पर अब नए ज़माने के लिए इन्हें, कहना चाहिए कि थोडा user - friendly बनाना चाहिए.
नए, पढ़े-लिखे, इतिहास में रुचि रखने वाले गाइड हों, कुछ ऑडियो-विजुअल तकनीक की मदद हो, गंदगी कम हो, बिजली की व्यवस्था पूरी हो (ताजमहल का संग्रहालय हम इसी लिए नहीं देख पाए क्यूंकि बिजली नहीं थी)... कुल मिला कर देखने वाले के समक्ष वो पुराना संसार जीवित कर देने की ललक और समझ हो तो क्या बात हो.
पर फिर भी, वाह ताज! तो कहा जायेगा, और अब पूर्णिमा की इक रात को वापिस आने का मौका तलाशा जायेगा.
लीजिये, कुछ तस्वीरें नज़र हैं -

सिकन्दरा (अकबर का मकबरा)


सिकन्दरा का मुख्य (दक्षिण) दरवाज़ा 


अकबर के मकबरे के भीतर से बाहर की ओर


बुलंद दरवाज़ा (फतेहपुर सीकरी)
 

फतेहपुर सीकरी के भीतर 


शेख सलीम चिश्ती की दरगाह 


    
सीकरी का दरवाज़ा 


ताज का पूर्वी दरवाज़ा 


पहली झलक 


वाह ताज! 

वाह ताज - एक बार फिर!

एक मीनार 


हाथ छुए तो गात मैला हो!

ताज के बराबर में मेहमानखाना 


ताज के बराबर में मस्जिद 

अक्स 

6 comments:

mukkul said...

Wahhh...Subhan Allahhh :-)

Anonymous said...

ear Rahulji

I good brief "WAH TAJ" , but the "rahulji" was missing from the post . Not like you - may be you were tired !!!!!!

Some Photographs were good ( not all this time though ) , but some were extraordinarily good . ( the first image is excellent )


The critique by

Ships

Anonymous said...

Rahul , you are an excellent photographer too ( in case you have shot these ) . I am only surprised how come being at Gurgaon , 200 kms away from Agra , this was your first visit to the place . Did you try Panchiwale ka Petha ?

Keep visiting more new and nearby places .
Nigam

Anonymous said...

Thanks Bhiaya for uploding Taj Pic's,

Hum ko Bhi Darshan ho gaye

Sunil

Rahul Gaur said...

Nigam Sir
Thanks for your appreciation - yes, I have shot all of these. And as of "excellent", you really use kind words :-) Thanks again.
And Panchhi Ka Petha is yum!!!
I brought one packet each of Paan, Orange, Gulaab and Saada. Only yesterday I was wondering how to get more now.
Actually, I never went to any place for all these places.
Par, as they say, जहाँ आँख खुले वहीँ सवेरा समझो.

Rahul Gaur said...

Sunil
Thanks for visiting :-)
Bolo Taj kee jai!!

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